Saturday, 5 March 2011

नहीं रहे राजनीति के अर्जुन
दिग्गज कांग्रेसी नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह का लंबी बीमारी के बाद शुक्रवार को निधन हो गया। एम्स में भर्ती 81 वर्षीय सिंह ने शाम करीब 5.30 बजे सांस लेने में दिक्कत की शिकायत की। डॉक्टरों के अनुसार सिंह को दिल का दौरा पड़ा और उन्होंने शाम करीब 6.15 बजे अंतिम सांस ली। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार सिंह का पार्थिव शरीर शनिवार को सीधी जिले के उनके पैतृक गांव चुरहट में दर्शन के लिए रखा जाएगा। अन्तिम संस्कार रविवार को चुरहट में होगा।

जतन से निभाया हर दायित्व

कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके अर्जुन सिंह को गांधी परिवार के प्रति निष्ठावान माना जाता था। मप्र के मुख्यमंत्री रह चुके सिंह नरसिंह राव और मनमोहन (यूपीए-1) सरकार में मानव संसाधन मंत्री रहे। उन्होंने उस वक्त पंजाब के राज्यपाल की जिम्मेदारी संभाली जब वहां उग्रवाद चरम पर था। दो बार सर्वश्रेष्ठ सांसद का पुरस्कार जीतने वाले सिंह की राजीव-लोंगोवाल समझौते में अहम भूमिका रही थी।


3 दिन का राजकीय शोक
अर्जुन सिंह के देहांत पर राज्य सरकार ने तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया है। शनिवार को प्रदेश के सभी शासकीय कार्यालयों में अवकाश रहेगा, स्कूल बंद रहेंगे। हालांकि, सभी बोर्ड परीक्षाएं यथावत होंगी।

शोक की लहर
अर्जुन सिंह के निधन से कांग्रेस में शोक की लहर दौड़ गई। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

विचित्र संयोग
अर्जुन सिंह का नाम शुक्रवार को ही कांग्रेस की सर्वोच्च नीति निर्धारक संस्था कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) से हटाकर उन्हें स्थाई आमंत्रित सदस्य मनोनीत किया गया था।

अपूरणीय क्षति
अर्जुन सिंह का निधन प्रदेश और देश के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने सीएम रहते हुए प्रदेश के विकास में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने पंजाब के राज्यपाल व केन्द्रीय मंत्रिमंडल में रहते हुए जिम्मेदारियों को भलीभांति निभाया।
रामेश्वर ठाकुर, राज्यपाल

कुशल राजनीतिज्ञ
वे कुशल राजनीतिज्ञ थे। उन्होंने जीवनभर पिछड़ों, कमजोरों और वंचित तबकों की खुशहाली व कल्याण के लिए काम किया। उनके निधन से प्रदेश ही नहीं देश के सार्वजनिक जीवन में जो शून्य पैदा हुआ है उसकी भरपाई मुश्किल होगी। शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री



अर्जुन सिंह का सफर :

जन्म-5 नवंबर 1930
1957 में पहली बार मध्य प्रदेश विधानसभा के लिए चुने गए
1985 तक लगातार चुने गए विधायक
1967 में पहली बार मध्यप्रदेश सरकार में कृषि मंत्री बने
1967 में ही मध्यप्रदेश सरकार में आयोजन व विकास मंत्री
1972 मध्यप्रदेश सरकार में शिक्षा मंत्री
1977-80 तक मध्यप्रदेश विधानसभा मे विपक्ष के नेता
1980-85 पहली बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री
मार्च 1985- पंजाब के राज्यपाल
1988-1989- दूसरी बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री
1991-1996 एमपी के सतना से सांसद चुने गए
1991-1994 - केंद्र सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री
1996 मे सतना से लोकसभा चुनाव हारे
1998 मे होशंगाबाद से सांसद का चुनाव हारे
अप्रेल 2000 - राज्यसभा के लिए चुने गए
2000-2004 गृह मंत्रालय के सलाहकार समिति के सदस्य
अप्रेल 2002 -2004 संसद की स्थाई समिति के सदस्य
2004-2009 - केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री
मार्च 2006- दोबारा राज्यसभा के लिए चुने गए
2000 में सर्वश्रेष्ठ सांसद का पुरस्कार


विवादों के अर्जुन

कांग्रेस नेता अर्जुन सिंह का विवादों से भी चोली दामन का साथ रहा है। मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री रहते हुए भी उन पर कई आरोप लगे तो अंतिम बार केंद्र सरकार में केबिनेट मंत्री रहते हुए भी आरक्षण के विवाद ने उनका पीछा नहंी छोड़ा।

भोपाल गैस विवाद

1984 में हुई भोपाल गैस त्रासदी के दौरान अर्जुन सिंह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। उन पर शहर को छोड़कर सुरक्षित स्थान पर चले जाने का आरोप है।

चुरहट लॉटरी विवाद

1980 में अर्जुन सिंह लॉटरी विवाद में भी फंसे । उन पर आरोप लगा कि उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुउए लॉटरी प्रक्रिया मे धांधली की। हालांकि उन पर लगे आरोप कभी साबित नहीं हो सके।

आरक्षण विवाद

अर्जुन सिंह के मानव संसाधन विकास मंत्री रहते हुए 2005 में आरक्षण पर एक बार फिर से विवाद छिड़ा था। सिंह ने संविधान मे संशोधन कर उच्च शिक्षण संस्थानों मे भी ओबीसी कोटे के लिए 27 फीसदी आरक्षण की वकालत की।

सिंगापुर में सैन्य प्रमुख के पद पर सिख की नियुक्ति
सिंगापुर ने ब्रिगेडियर जनरल रवीन्द्र सिंह को अगला सैन्य प्रमुख नियुक्त किया है। सिंगापुर के 30 साल के सैन्य इतिहास में पहली बार इस प्रमुख पद पर किसी सिख की नियुक्ति की गयी है।
सिंह 25 मार्च को मेजर जनरल चांग चुन सिंग से पदभार ग्रहण करेंगे।
भारतीय मूल के सिंगापुर निवासी सिंह फिलहाल रक्षा मंत्रालय में उप सचिव :तकनीकी: के पद पर तैनात हैं। उन्होंने दिसंबर 1982 में सिंगापुर सैन्य बल में नौकरी शुरू की थी।

कृष्ण प्रसाद भट्टराई नहीं रहे
नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और नेपाली संसद के संस्थापक नेता कृष्ण प्रसाद भट्टराई का शुक्रवार देर रात निधन हो गया. कृष्ण प्रसाद भट्टराई 87 साल के थे और नेपाली कांग्रेस के संस्थापक नेताओं की अंतिम जीवित कड़ी थे

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